बिहार की स्थिति के बारे में बताए

 बिहार की स्थिति के बारे में बताए 

बिहारियों के साथ अन्य राज्यों में दूर व्यवहार होना कोई नई बात नहीं है। पहले महाराष्ट्र ,असम और अब तमिलनाडू । तो आइए हम बिहारियों की और बिहार की परिस्थिति के बारे में समझने का प्रयास करें।

बिहार की परिस्थिति

बिहार का प्राचीन इतिहास बेहद ही शानदार रहा है। परंतु आज बिहार की परिस्थिति देखकर मुझे बहुत अफसोस होता हैं। बिहार की गिनती पिछले राज्यों में की जाती है। नीति आयोग द्वारा जारी बहुआयामी गरीबी सूचकांक, 2021 में बिहार को देश का सबसे गरीब राज्य बताया गया है। 

बिहार में गरीबी होने का मुख्य कारण है 

मजदूरों का पलायन : 

2000 ईसवी में बिहार और झारखंड के अलग हो जाने के बाद बिहार की परिस्थिति खराब होती चली गई। बिहार में काम की कमी होने के कारण यहां के लोग पलायन करने में मजबूर हो गए। 

बिहार में कम साक्षरता दर

 बिहार के अंदर बेरोजगारी होने का एक बड़ा कारण बिहार की कम साक्षरता दर भी है। यदि आप सन 2011 की साक्षरता दर पर नजर डालेंगे तो आप देखेंगे कि बिहार की साक्षरता दर 61.80 प्रतिशत है और इसके अंदर महिला साक्षरता बहुत ही कम 51 प्रतिशत है जबकि पुरूष साक्षरता 71 प्रतिशत है।सबसे अधिक महिला साक्षरता वाला जिला रोहतास है ।और सबसे कम महिला साक्षरता वाला जिला सहरसा है। कम साक्षर होने की वजह से अधिकतर लोग कोई कौशल नहीं सीख पाते हैं। वे मजदूरी करते हैं। 

 आपदा से अधिक प्रभावित

बिहार के अधिकतर क्षेत्र साल के तीन महीने बाढ़ से प्रभावित होते हैं। फसल का नुकसान भारी मात्रा में होता हैं। जिससे राज्य को आर्थिक नुकसान होता है। बिहार सर्वाधिक आपदा प्रभावित राज्य के अंदर आता है।बिहार मे 2020 मे आई बाढ़ से अब तक 16 जिलों में 74 लाख से ज्यादा की आबादी प्रभावित हुई है। और बिहार की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां पर दो तरह की मार झेलनी पड़ती है। एक तो अधिक सूखे की समस्या होती है तो दूसरी नदियों के बांध टूटने से बाढ़ का खतरा मंडराता रहता है।

  बड़े कंपनियों का बिहार से दूरी बनाए रखना  

बिहार में बड़ी कंपनी आना नहीं चाहती क्योंकि यहां की नीति सही नहीं हैं। कई बड़ी कम्पनियाँ बिहार में मानव संसाधन की उपलब्धता को देखते हुए यहां निवेश करना चाहती हैं। लेकिन यहां की उद्योग नीति और बुनियादी संसाधनों की कमी के कारण वे ऐसा नहीं कर पाती। सरकार को बिहार में निवेशकों के लिए टैक्स और GST मुक्त करके भी बड़े स्तर पर निवेशकों को बिहार में लाया जा सकता है। 

 जनसंख्या में वृद्धि 

बिहार में जनसंख्या वृद्धि की दर में काफी तेजी हो गई है। जिसके कारण से यहां के लोगों को नौकरियां मिलने तथा किसी भी सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं और वित्त संसाधनों में लगातार कमी होती जा रही है जिसके कारण जीवन स्तर निम्न होता जा रहा है। 

निष्कर्ष

बिहार में अगर बहार लाना है तो हमें जनता को अपना कर्तव्य सही रूप से निभाना होगा। सरकार को भी मानव कल्याण के लिए कुछ ठोस कदम उठाने होगें। कानून व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा । शिक्षा के क्षेत्र में भी सुधार लाने की आवश्कता है। टॉपर घोटाला तो पूरे देश के सामने हमारे सिस्टम की पोल खोलता है। गुंडा गर्दी को खत्म कराना होगा। आपदा के लिए तैयारी अच्छी रखनी होगी , ताकि जल्द से जल्द किसी भी तरह की आपदा पर नियंत्रण पाया जा सके। महिला सुरक्षा पर बने कानून व्यवस्था को सही रूप से चलाना होगा। जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने होगें। बड़ी कंपनी को बिहार में स्थापित कराना होगा। तभी हमारा बिहार प्रगति के रथ पर सवार होगा। और अन्य राज्यों में बिहारी मजदूर को अपमानित भी नहीं होना होगा।

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